राहुल दुबे.ममता कॉलोनी में रहने वाली 45 साल की मुन्नी पति इस्माल खान। मई शुरू होते ही तबीयत नासाज रहने लगी। एनीमिया की परेशानी तो पहले से थी ही, खांसी, बुखार ने भी घर कर लिया था। नौ दिन तक परेशानी झेलती रहीं। आखिर में परिवार ने अस्पताल का रुख किया। बच्चे, पति से वह कहती रही कि कोई ज्यादा परेशानी नहीं है। अस्पताल की जरूरत नहीं है। 10 मई को उनकी रिपोर्ट पाॅजिटिव आई और अगले ही दिन यानी 11 मई को उनका इंतकाल हो गया। बच्चे, पति, एमआर टीबी अस्पताल के बाहर भूखे, प्यासे रहकर मां की हालत आने-जाने वालों से पूछते रहते थे। कभी-कभी मोबाइल पर भी बात हो जाती थी। मां बच्चों से कहती कि तुम अपना ध्यान रखो। घर जाओ। मैं जल्दी ठीक होकर आ जाऊंगी। 11 मई को जब इंतकाल की खबर आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्पताल से सीधे क्रबिस्तान उन्हें ले जाया गया। सफेद चादर में लिपटी मुन्नी को परिवार के लोग देख भी नहीं पाए। पंजे के बल खड़े होकर दूर से ही मुन्नी का चेहरा देखने की कोशिश परिजन करते रहे। इंतकाल की खबर रिश्तेदारों को लगी तो वह भी अपने ही घर पर सिसक कर रह गए। कारण यह कि उनके घर को क्वारेंटाइन कर दिया गया। काॅलोनी तो पहले से ही कंटेनमेंट एरिया बनी हुई थी। लिहाजा कोई आ-जा भी नहीं सकता था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


राहुल दुबे.ममता कॉलोनी में रहने वाली 45 साल की मुन्नी पति इस्माल खान। मई शुरू होते ही तबीयत नासाज रहने लगी। एनीमिया की परेशानी तो पहले से थी ही, खांसी, बुखार ने भी घर कर लिया था। नौ दिन तक परेशानी झेलती रहीं। आखिर में परिवार ने अस्पताल का रुख किया। बच्चे, पति से वह कहती रही कि कोई ज्यादा परेशानी नहीं है। अस्पताल की जरूरत नहीं है। 10 मई को उनकी रिपोर्ट पाॅजिटिव आई और अगले ही दिन यानी 11 मई को उनका इंतकाल हो गया। बच्चे, पति, एमआर टीबी अस्पताल के बाहर भूखे, प्यासे रहकर मां की हालत आने-जाने वालों से पूछते रहते थे। कभी-कभी मोबाइल पर भी बात हो जाती थी। मां बच्चों से कहती कि तुम अपना ध्यान रखो। घर जाओ। मैं जल्दी ठीक होकर आ जाऊंगी। 11 मई को जब इंतकाल की खबर आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्पताल से सीधे क्रबिस्तान उन्हें ले जाया गया। सफेद चादर में लिपटी मुन्नी को परिवार के लोग देख भी नहीं पाए। पंजे के बल खड़े होकर दूर से ही मुन्नी का चेहरा देखने की कोशिश परिजन करते रहे। इंतकाल की खबर रिश्तेदारों को लगी तो वह भी अपने ही घर पर सिसक कर रह गए। कारण यह कि उनके घर को क्वारेंटाइन कर दिया गया। काॅलोनी तो पहले से ही कंटेनमेंट एरिया बनी हुई थी। लिहाजा कोई आ-जा भी नहीं सकता था।



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