नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षकों की गुणवत्ता का स्तर और ऊपर उठाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। नई स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के स्वरूप में भी बदलाव होंगे। अभी तक टीईटी परीक्षा दो हिस्सों में बंटी हुई थी। पार्ट-1 और पार्ट-2। लेकिन अब इस व्यवस्था का स्वरूप चार हिस्सों में बंट जाएगा। इनमें फाउंडेशन, प्रीपेरेटरी, मिडिल और सेकंडरी शामिल है। इसी के अनुसार टीईटी का पैटर्न भी तैयार किया जाएगा। विषय शिक्षकों की भर्ती के समय टीईटी या संबंधित सब्जेक्ट में एनटीए टेस्ट स्कोर भी चेक किया जा सकता है। सभी विषयों की परीक्षाएं और एक कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करेगा। उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व प्राचार्य डॉ. जीडी सिंह के अनुसार जो उम्मीदवार टीईटी पास करेंगे, उन्हें एक डेमोस्ट्रेशन या इंटरव्यू देकर स्थानीय भाषा में अपना ज्ञान भी दिखाना होगा। नई शिक्षा नीति के मुताबिक अब इंटरव्यू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होगा। इंटरव्यू में देखा जाएगा कि शिक्षक क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को आसानी और सहजता के साथ पढ़ाने के काबिल है या नहीं। टीईटी पास करने के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी यह शिक्षकों की भर्ती के लिए अनिवार्य होगा। स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और खाली पदों के ब्यौरे का डिजिटली प्रबंधन किया जाएगा। पारदर्शी होगी भर्ती प्रक्रिया, योग्यता आधारित प्रमोशन : पेशेवर मानकों की समीक्षा एवं संशोधन 2030 में होगा। इसके बाद प्रत्येक 10 साल में समीक्षा होगी। नीति में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षकों को पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए भर्ती किया जाएगा। पदोन्नति भी योग्यता आधारित होगी। समय-समय पर कार्य-प्रदर्शन के आकलन के आधार पर शैक्षणिक प्रशासक बनने की व्यवस्था होगी। 2030 से शिक्षक बनने के लिए 4 वर्षीय बीएड डिग्री जरूरी : नई शिक्षा नीति में योग्यता में भी बदलाव किया गया है। शिक्षक बनने के लिए साल 2030 से चार वर्षीय बीएड डिग्री न्यूनतम क्वालिफिकेशन होगी। निम्न स्तर के शिक्षण शिक्षा संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आंगनबाड़ीकर्मियों को भी लेना होगा प्रशिक्षण सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू होने के साथ ही बेसिक स्तर के शिक्षक और आंगनबाड़ीकर्मियों को भी छह महीने और एक साल का विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। 12वीं और इससे उच्च स्तर पर शिक्षितों को केवल छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स करना होगा। जबकि इससे कम शिक्षा वाली आंगनबाड़ीकर्मियों को एक साल का डिप्लोमा कोर्स कराया जाएगा। नई नीति में इसका प्रावधान किया गया है। इससे प्री-प्राइमरी शिक्षकों का शुरूआती कैडर तैयार हो सकेगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


नई शिक्षा नीति-2020 में शिक्षकों की गुणवत्ता का स्तर और ऊपर उठाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। नई स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के स्वरूप में भी बदलाव होंगे। अभी तक टीईटी परीक्षा दो हिस्सों में बंटी हुई थी। पार्ट-1 और पार्ट-2। लेकिन अब इस व्यवस्था का स्वरूप चार हिस्सों में बंट जाएगा। इनमें फाउंडेशन, प्रीपेरेटरी, मिडिल और सेकंडरी शामिल है। इसी के अनुसार टीईटी का पैटर्न भी तैयार किया जाएगा। विषय शिक्षकों की भर्ती के समय टीईटी या संबंधित सब्जेक्ट में एनटीए टेस्ट स्कोर भी चेक किया जा सकता है। सभी विषयों की परीक्षाएं और एक कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) करेगा।
उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व प्राचार्य डॉ. जीडी सिंह के अनुसार जो उम्मीदवार टीईटी पास करेंगे, उन्हें एक डेमोस्ट्रेशन या इंटरव्यू देकर स्थानीय भाषा में अपना ज्ञान भी दिखाना होगा। नई शिक्षा नीति के मुताबिक अब इंटरव्यू शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होगा। इंटरव्यू में देखा जाएगा कि शिक्षक क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को आसानी और सहजता के साथ पढ़ाने के काबिल है या नहीं। टीईटी पास करने के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी यह शिक्षकों की भर्ती के लिए अनिवार्य होगा। स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती और खाली पदों के ब्यौरे का डिजिटली प्रबंधन किया जाएगा। पारदर्शी होगी भर्ती प्रक्रिया, योग्यता आधारित प्रमोशन : पेशेवर मानकों की समीक्षा एवं संशोधन 2030 में होगा। इसके बाद प्रत्येक 10 साल में समीक्षा होगी। नीति में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षकों को पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए भर्ती किया जाएगा। पदोन्नति भी योग्यता आधारित होगी। समय-समय पर कार्य-प्रदर्शन के आकलन के आधार पर शैक्षणिक प्रशासक बनने की व्यवस्था होगी।
2030 से शिक्षक बनने के लिए 4 वर्षीय बीएड डिग्री जरूरी : नई शिक्षा नीति में योग्यता में भी बदलाव किया गया है। शिक्षक बनने के लिए साल 2030 से चार वर्षीय बीएड डिग्री न्यूनतम क्वालिफिकेशन होगी। निम्न स्तर के शिक्षण शिक्षा संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आंगनबाड़ीकर्मियों को भी लेना होगा प्रशिक्षण
सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू होने के साथ ही बेसिक स्तर के शिक्षक और आंगनबाड़ीकर्मियों को भी छह महीने और एक साल का विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। 12वीं और इससे उच्च स्तर पर शिक्षितों को केवल छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स करना होगा। जबकि इससे कम शिक्षा वाली आंगनबाड़ीकर्मियों को एक साल का डिप्लोमा कोर्स कराया जाएगा। नई नीति में इसका प्रावधान किया गया है। इससे प्री-प्राइमरी शिक्षकों का शुरूआती कैडर तैयार हो सकेगा।



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