जिले में सोयाबीन की फसलों में पीला मोजेक रोग लगने लगा है, जिससे किसानों को फसल को लेकर चिंता सताने लगी है। अब किसान फसल काे बचाने के लिए जुट गए हैं। किसान पीला मोजेक रोग से छुटकारा पाने फसलों में कीटनाशक डाल रहें हैं। लेकिन इन कीटनाशकों के छिड़काव से भी कोई फायदा नहीं हो रहा है।
ग्राम मालेगांव तहसील भैंसदेही के किसान डॉ. राजू महाले, दुर्गादास महाले, डॉ. संतोष बघेल, इंदल बघेल, पंजाबराव बारस्कर, वासुदेव गव्हाड़े, रमेश ठाकरे, जगन्नाथ ठाकरे, सरवाराम मौसिक, सतीश बोडखे, रवि भराड़े, जगजीवन भराड़े, छन्नू कनाठे, विनायक कनाठे, नायक कनाठे, साधु भागबोले, तुकाराम भागबोले सहित अन्य किसानों के खेतो में सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मक्का एवं गन्ना की फसलें पीला मोजेक इल्ली के प्रकोप से नष्ट हो रही है। किसान कृषि विज्ञान केंद्र के पौधे संरक्षण वैज्ञानिकों की सलाह पर वह फसलों पर अलिका, इमिडाक्लोप्रिड जैसी महंगी दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं, इसके बाद भी फसल को कोई फायदा नहीं हुआ है। वर्तमान में कहीं पर 30 प्रतिशत और कही 80 प्रतिशत तक फसलें नष्ट हो रही हैं।
लगातार बढ़ रहा सफेद मक्खी का खतरा
पीला मोजेक के अलावा फसलों पर सफेद मक्खी का भी प्रकोप है। सोयाबीन, उड़द के अलावा अन्य फसल पर भी सफेद मक्खी का खतरा लगातार बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि सफेद मक्खी से स्वस्थ पौधों को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में किसानों को पीला मोजेक से फसल बचाव की कोई सलाह नहीं मिल रही है। किसानों का कहना है कि पीला मोजेक से फसलें नष्ट होने की कगार पर हैं।
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