फूप कस्बे के लिए स्वीकृत मुख्यमंत्री जलावर्धन योजना का काम रेंग रेंगकर चल रहा हैं। दो साल पहले योजना का काम शुरू हुआ जो बीते सितंबर 2020 में ही पूरा हो जाना था, लेकिन अभी तक 50 फीसदी भी काम पूरा नहीं हुआ है। काम की गति ऐसी है कि 10 दिन काम चलता है और महीनों तक बंद हो जाता है। ताजा हालात ऐसे हैं कि जनवरी माह के दस दिन पहले काम बंद हुआ जो आठ महीने गुजर जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सका। अचंभा यह है कि, पानी के लिए जद्दोजहद कर रहे फूप की ओर न तो जनप्रतिनिधियों का ध्यान है और नहीं नगर पंचायत अधिकारियों का।
गौरतलब है कि फूप कस्बे के लिए शासन ने 12.36करोड़ रुपए की लागत से जलावर्धन योजना मंजूर की, जिसका काम साल 2018 में शुरू हो गया। जलावर्धन योजना के तहत पूरे कस्बे में पाइप लाइन बिछानी थी, साथ ही कस्बे की परिवहन कॉलोनी और शासकीय मिडिल स्कूल के पास एक-एक पानी की टंकी बननी थी, जिनसे फिल्टर किया हुआ पानी कस्बे के घर-घर तक सप्लाई होना है। यह योजना फूप के लिए सपना सा बनकर रह गई है, जो पूरा हो ही नहीं रहा। वहीं काम पूरा होने के लिए सिर्फ एक माह शेष रह गया है, अभी पर अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा कस्बे के 10 किलोमीटर एरिया में पाइप लाइन बिछाई गई है। वहीं दो टंकियों में से एक का निर्माण किया गया है। वहीं दूसरी टंकी के अभी पिलर खड़े हो पाए हैं। वहीं फिल्टर प्लांट का तो अता-पता ही नहीं कि वह कहां बनने जा रहा है। इससे अभी यह अनुमान लगाया जा सकता है कि फूप में इस योजना से एक साल तक लोगों को पानी मिलना संभव दिखाई नहीं दे रहा है।
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