भीलवाड़ा मॉडल की तर्ज पर इंदौर प्रशासन पूरे शहर की स्क्रीनिंग करेगा। इसके लिए 1844 टीमें बनाई हैं। कंटेनमेंट एरिया की करीब 12 लाख आबादी के बाद अब इस एरिया के बाहर की 12 लाख आबादी का सर्वे और जांच का काम बुधवार से शुरू हो जाएगा। इनमें एक हजार निगम के कर्मचारी हैं, 250 शिक्षक हैं और बाकी आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।
ये टीमें घर-घर जाकर चार सवाल पूछेंगी। क्या आपके घर में किसी को खांसी है? क्या किसी को सर्दी है? क्या किसी को सांस लेने में परेशानी है? हार्ट, बीपी, शुगर संबंधित कोई बीमारी है? इनमें से किसी भी सवाल का जवाब हां में दिया तो एक डॉक्टर आपके घर पर आ जाएगा। निगमायुक्त आशीष सिंह ने बताया स्क्रीनिंग के लिए कचरा गाड़ियां के 467 रूट को आधार बनाया है। हालांकि आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी के कर्मचारियों ने कंटेनमेंट एरिया में स्क्रीनिंग कर ली है। उसे छोड़कर सभी रूट्स पर निगम के रूट प्रभारी के साथ 3-3 टीमें लगाईं गईं हैं। यह टीम घर-घर जाकर यह जानकारी लेगी। हर वार्ड में एक डॉक्टर की भी ड्यूटी रहेगी। एक बार सर्वे पूरा होने के लिए 5 से 6 दिन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें पूरा शहर टीम को कवर करना है। सर्वे पूरा होने के छह दिन बार फिर से सर्वे किया जाएगा ताकि किसी को बाद में लक्षण दिखे तो उसका भी पता चल सके। इससे शहर का रिकॉर्ड निगम के पास आ जाएगा।
3 दिन में आएगी 60 लाख की मशीन, रोजाना होंगे 800 टेस्ट
इंदौर में कोरोना के सैंपल की टेस्टिंग तेजी से हो सकेगी। इसके लिए इंदौर और भोपाल को 60-60 लाख रुपए की पीसीआर मशीनें जल्द मिल जाएंगी। इंदौर में यश टेक्नोलॉजी के एमडी कीर्ति कुमार बाहेती व सीईओ मनोज बाहेती इस मशीन की राशि सीएसआर एक्टिविटी के तहत दी है। वहीं, भोपाल में प्रिज्म सीमेंट ने यह राशि दी है। यह मशीन दो घंटे में औसतन 96 टेस्ट कर सकती है। इस तरह दिनभर में करीब 800 टेस्ट इससे हो सकते हैं। चार दिन पहले मुख्य सचिव ने टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव मेडिकल एजुकेशन को दी थी। तब इंदौर में एकेवीएन एमडी कुमार पुरुषोत्तम ने कंपनियों से सीएसआर एक्टीविटी के तहत यह मशीन देने की बात कही। यश टेक्नोलॉजी के सीएफओ धर्मेंद्र जैन ने एमडी बाहेती से बात कर इस पर सहमति दी। बेंगलुरू की कंपनी को 60 लाख जमा करा दिए। प्रमुख सचिव के मुताबिक मशीन तीन दिन में इंदौर आ जाएगी। कमिश्नर आकाश त्रिपाठी ने बताया मशीन आने से इंदौर का बैकलॉग खत्म होगा और रोज के रोज सभी सैंपलों की जांच कर सकेंगे।
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