अल्पसंख्यक इलाकों में लगातार मौतें और जनाजे निकलने के बाद प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता का थोड़ा असर दिख रहा है। पॉजिटिव मरीजों की संख्या कम हुई है तो अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के जान गंवाने का सिलसिला भी थमा है। कब्रिस्तानों में जनाजे भी कम पहुंच रहे। भास्कर द्वारा अचानक हो रही मौत और मेडिकल उपकरणों की डिमांड से जुड़े खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 400 टीमें इन क्षेत्रों में भेजी।
लगभग 34 हजार लोगों का सर्वे हो चुका है। इनमें से 350 लोगों को सामान्य सर्दी-खांसी मिली तो 90 लोगों को सांस से जुड़ी तकलीफ थी। कोरोना के लक्षण वाले मरीज सामने नहीं आए। स्क्रीनिंग व सर्वे के कारण बीमारी से दम तोड़ने वालों की संख्या भी घटी है। मार्च में चार बड़े कब्रिस्तानों में 130 जनाजे पहुंचे थे तो 1 से 7 अप्रैल के बीच 127, 11 अप्रैल तक 229 और फिर 21 अप्रैल तक आंकड़ा 357 पर पहुंचा। मार्च के मुकाबले ये संख्या ढाई गुना है, पर राहत ये कि 10 दिन में जनाजे घटकर 128 हुए हैं। सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया के मुताबिक, ऐसे चिह्नित इलाकों में एक-एक व्यक्ति का सर्वे हो गया है। सभी को उपचार की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं।

लोग खुद बताने लगे बीमारी
पूर्व पार्षद फातिमा रफीक खान के मुताबिक, मंगलवार को इन चार कब्रिस्तान में मात्र 6 जनाजे पहुंचे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष फोजिया शेख अलीम ने बताया कि लोग खुद बीमारी बताने लगे हैं। बीमारों को तत्काल इलाज मुहैया करवा रहे हैं। 12 अप्रैल के बाद कलेक्टर हर इलाके की स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमले से मॉनिटरिंग करवा रहे हैं।
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