टैक्स माफ नहीं किए जाने से घाटा होने और बसों में सीमित संख्या का पालन करना संभव नहीं हो पाने का हवाला देते हुए बस ऑपरेटर्स ने मंगलवार को बसेेंनहीं चलाईं। लगभग 200 बसों के शुरू होने की संभावना बस चलाने की अनुमति दिए जाने के बाद बन रही थी। लेकिन ये बसें प्रदेशव्यापी संयुक्त विरोध के कारण नहीं चल पाईं। बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास आर्य ने बताया पूरे प्रदेश में बसों का संचालन शुरू नहीं किया है। 200 से अधिक छोटी-बड़ी बसें जिले में चलती हैं, लेकिन इनका संचालन शुरू नहीं किया है। लॉकडाउन की अवधि में लंबे समय से बसें खड़ी हैं। बसों से कोई आवक नहीं हुई है, लेकिन टैक्स माफ नहीं किया है। 50 प्रतिशत यात्री संख्या के साथ बस का संचालन करना संभव नहीं है। दरअसल यात्री सीमित संख्या में रहने की व्यवस्था बनाना बेहद कठिन है। दूसरे राज्यों में टैक्स माफ किए गए हैं। इसीलिए मप्र में भी टैक्स में छूट दी जानी चाहिए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


टैक्स माफ नहीं किए जाने से घाटा होने और बसों में सीमित संख्या का पालन करना संभव नहीं हो पाने का हवाला देते हुए बस ऑपरेटर्स ने मंगलवार को बसेेंनहीं चलाईं। लगभग 200 बसों के शुरू होने की संभावना बस चलाने की अनुमति दिए जाने के बाद बन रही थी। लेकिन ये बसें प्रदेशव्यापी संयुक्त विरोध के कारण नहीं चल पाईं।

बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास आर्य ने बताया पूरे प्रदेश में बसों का संचालन शुरू नहीं किया है। 200 से अधिक छोटी-बड़ी बसें जिले में चलती हैं, लेकिन इनका संचालन शुरू नहीं किया है। लॉकडाउन की अवधि में लंबे समय से बसें खड़ी हैं। बसों से कोई आवक नहीं हुई है, लेकिन टैक्स माफ नहीं किया है। 50 प्रतिशत यात्री संख्या के साथ बस का संचालन करना संभव नहीं है। दरअसल यात्री सीमित संख्या में रहने की व्यवस्था बनाना बेहद कठिन है। दूसरे राज्यों में टैक्स माफ किए गए हैं। इसीलिए मप्र में भी टैक्स में छूट दी जानी चाहिए।



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