ग्वालियर से 14 किमी दूर स्थित ग्राम कुलैथ में चल रहे भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में चल रहे वार्षिकोत्सव का बुधवार को समापन हुआ। मंदिर के मुख्य पुजारी किशोरीलाल श्रीवास्तव ने बुधवार को सुबह भगवान जगन्नाथ की आरती कर अन्नकूट का भोग लगाया व शाम को भात के 18 घट समर्पित किए। जैसे ही वे भगवान जगन्नाथ जी के सामने घट लाया गया तो वह स्वत: ही फट गया। यह देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ जी का भात जगत पसारे हाथ और भगवान जगन्नाथ जी की जय के जयकारे लगाए। भगवान जगन्नाथ जी के दो दिवसीय वार्षिक उत्सव कोरोना संक्रमण के चलते सामान्य तरीके से ही मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर मे कुछ ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया था और वे भी सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए दूर-दूर खड़े थे। महोत्सव के तहत औपचारिता के लिए मंदिर परिसर में ही इसके लिए जनकपुरी बनाई थी। यहां मंगलवार को भगवान जगन्नाथ जी ने विश्राम किया। बुधवार की सुबह भगवान जगन्नाथ जी का शृंगार किया गया। इस अवसर पर घट चढ़ाए गए। मुख्य पुजारी किशोरीलाल ने 18 घट चढ़ाए। भगवान जगन्नाथ जी के सामने जैसे ही वे घट लेकर जाते घट स्वत: ही चार भाग में फट जाता। इसके उपरांत वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ जी का प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान भजन कीर्तनभी हुए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Lord Jagannath had to pay for Annakoot in the morning, 18 in the evening


ग्वालियर से 14 किमी दूर स्थित ग्राम कुलैथ में चल रहे भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में चल रहे वार्षिकोत्सव का बुधवार को समापन हुआ। मंदिर के मुख्य पुजारी किशोरीलाल श्रीवास्तव ने बुधवार को सुबह भगवान जगन्नाथ की आरती कर अन्नकूट का भोग लगाया व शाम को भात के 18 घट समर्पित किए। जैसे ही वे भगवान जगन्नाथ जी के सामने घट लाया गया तो वह स्वत: ही फट गया। यह देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ जी का भात जगत पसारे हाथ और भगवान जगन्नाथ जी की जय के जयकारे लगाए।
भगवान जगन्नाथ जी के दो दिवसीय वार्षिक उत्सव कोरोना संक्रमण के चलते सामान्य तरीके से ही मनाया गया। कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर मे कुछ ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया था और वे भी सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए दूर-दूर खड़े थे।
महोत्सव के तहत औपचारिता के लिए मंदिर परिसर में ही इसके लिए जनकपुरी बनाई थी। यहां मंगलवार को भगवान जगन्नाथ जी ने विश्राम किया। बुधवार की सुबह भगवान जगन्नाथ जी का शृंगार किया गया। इस अवसर पर घट चढ़ाए गए। मुख्य पुजारी किशोरीलाल ने 18 घट चढ़ाए। भगवान जगन्नाथ जी के सामने जैसे ही वे घट लेकर जाते घट स्वत: ही चार भाग में फट जाता। इसके उपरांत वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ जी का प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान भजन कीर्तनभी हुए।



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