बिलौआ में गिट्‌टी से भरे वाहनों से अस्थायी दखल की राशि वसूलने के लिए बनाए गए टोल नाके पर बिलौआ नगर परिषद के अधिकारियों ने स्थायी कर्मचारियों के बजाय संविदा कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। वसूली करने के लिए जिन अस्थायी कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है, वे दो साल पहले गड़बड़ी पकड़े जाने पर तत्कालीन एसडीएम द्वारा हटा दिए गए थे। खास बात यह है कि औसत 40 से 45 हजार तक होने वाली वसूली दो महीने से 20 से 22 हजार तक रह गई है। परिषद के पूर्व पार्षद ने मामले की शिकायत एसडीएम से की है। बिलौआ नगर परिषद क्षेत्र में काफी संख्या में क्रेशर संचालित हैं। यहां आने वाले वाहनों से अस्थायी दखल की राशि वसूलने के लिए नगर परिषद ने टोल नाका लगाया है। नाके से प्रतिदिन एक हजार से बारह सौ वाहन निकलते हैं। वर्ष 2017-18 में तत्कालीन एसडीएम अमनवीर सिंह बैंस ने उस समय के पार्षदों द्वारा की गई शिकायत के बाद जांच की तो नाके पर 22 लाख रुपए की गड़बड़ी का मामला सामने आया था। इस मामले में नगर परिषद के सहायक राजस्व निरीक्षक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। साथ ही नाके पर वसूली कार्य में लगे सभी स्थायी व अस्थायी कर्मचारियों को हटा दिया गया था। अब नगर परिषद अधिकारियों ने नाके से हटाए गए कुछ अस्थायी कर्मचारियों की फिर वहीं ड्यूटी लगा दी है। अब इन्हीं के ऊपर पूरी तरह से वसूली की जिम्मेदारी है। ऐसे में फिर गड़बड़ी के आरोप लगने लगे हैं। पूर्व पार्षद जगदीश शर्मा ने मामले की शिकायत एसडीएम व कलेक्टर से की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 22 लाख से अधिक की निकली थी गड़बड़ी तत्कालीन एसडीएम ने शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों को नाके पर बैठाया तो वसूली में दोगुना इजाफा हो गया था। इसके बाद जांच की गई तो करीब 22 लाख से अधिक की गड़बड़ी निकली। मामले में सहायक राजस्व निरीक्षक वासुदेव शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। यह मामला अभी विचाराधीन है। इसके अलावा परिषद के अस्थायी कर्मचारी अर्जुन चौरसिया, संतोष यादव और अंकित चौरसिया को नाके से हटा दिया गया था। मार्च 2020 से इन कर्मचारियों को फिर नाके पर वसूली के लिए तैनात कर दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं टोक नाके पर वर्ष 2019 में दस महीने के लिए 1.24 करोड़ रुपए का ठेका हुआ था। मार्च में दोबारा से ठेका देने के लिए नगर परिषद द्वारा टेंडर भी निकाले गए थे, लेकिन रेट अधिक होने से ठेका नहीं हो पाया। इसके बाद नगर परिषद ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया ही नहीं गई। इस कारण नाके पर परिषद द्वारा ही वसूली की जा रही है। प्रतिदिन औसतन 40 से 56 हजार की वसूली होनी चाहिए, लेकिन अभी प्रतिदिन 20 से 22 हजार तक की राशि जमा हो रही है। इसके पीछे अधिकारियों द्वारा वाहनों की संख्या में कमी आना बताया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरे लगवाएंगे मैंने दो दिन पहले ही नगर परिषद बिलौआ में प्रशासक का चार्ज लिया है। परिषद के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी रिवाइज कर रहे हैं। टोल नाके पर भी एक स्थायी कर्मचारी रखा जाएगा और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। प्रतिज्ञा शर्मा, प्रशासक, नगर परिषद बिलौआ गड़बड़ी की जांच की जाएगी क्रेशर मार्केट के टोल नाके पर गड़बड़ी की शिकायत पर एक दल गठित कर ड्यूटी लगाई थी। इस दौरान सब कुछ सही हो गया था। यदि अब फिर से टोल नाके पर वसूली में गडबड़ी हो रही है, तो इस मामले की जांच कराई जाएगी। राघवेंद्र पांडेय, एसडीएम, डबरा Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 2 years ago, employees who were accused of embezzlement, they were again charged with toll collection


बिलौआ में गिट्‌टी से भरे वाहनों से अस्थायी दखल की राशि वसूलने के लिए बनाए गए टोल नाके पर बिलौआ नगर परिषद के अधिकारियों ने स्थायी कर्मचारियों के बजाय संविदा कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। वसूली करने के लिए जिन अस्थायी कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है, वे दो साल पहले गड़बड़ी पकड़े जाने पर तत्कालीन एसडीएम द्वारा हटा दिए गए थे। खास बात यह है कि औसत 40 से 45 हजार तक होने वाली वसूली दो महीने से 20 से 22 हजार तक रह गई है। परिषद के पूर्व पार्षद ने मामले की शिकायत एसडीएम से की है।
बिलौआ नगर परिषद क्षेत्र में काफी संख्या में क्रेशर संचालित हैं। यहां आने वाले वाहनों से अस्थायी दखल की राशि वसूलने के लिए नगर परिषद ने टोल नाका लगाया है। नाके से प्रतिदिन एक हजार से बारह सौ वाहन निकलते हैं। वर्ष 2017-18 में तत्कालीन एसडीएम अमनवीर सिंह बैंस ने उस समय के पार्षदों द्वारा की गई शिकायत के बाद जांच की तो नाके पर 22 लाख रुपए की गड़बड़ी का मामला सामने आया था। इस मामले में नगर परिषद के सहायक राजस्व निरीक्षक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। साथ ही नाके पर वसूली कार्य में लगे सभी स्थायी व अस्थायी कर्मचारियों को हटा दिया गया था। अब नगर परिषद अधिकारियों ने नाके से हटाए गए कुछ अस्थायी कर्मचारियों की फिर वहीं ड्यूटी लगा दी है। अब इन्हीं के ऊपर पूरी तरह से वसूली की जिम्मेदारी है। ऐसे में फिर गड़बड़ी के आरोप लगने लगे हैं। पूर्व पार्षद जगदीश शर्मा ने मामले की शिकायत एसडीएम व कलेक्टर से की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

22 लाख से अधिक की निकली थी गड़बड़ी
तत्कालीन एसडीएम ने शिकायत मिलने पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों को नाके पर बैठाया तो वसूली में दोगुना इजाफा हो गया था। इसके बाद जांच की गई तो करीब 22 लाख से अधिक की गड़बड़ी निकली। मामले में सहायक राजस्व निरीक्षक वासुदेव शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। यह मामला अभी विचाराधीन है। इसके अलावा परिषद के अस्थायी कर्मचारी अर्जुन चौरसिया, संतोष यादव और अंकित चौरसिया को नाके से हटा दिया गया था। मार्च 2020 से इन कर्मचारियों को फिर नाके पर वसूली के लिए तैनात कर दिया गया है।

टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं
टोक नाके पर वर्ष 2019 में दस महीने के लिए 1.24 करोड़ रुपए का ठेका हुआ था। मार्च में दोबारा से ठेका देने के लिए नगर परिषद द्वारा टेंडर भी निकाले गए थे, लेकिन रेट अधिक होने से ठेका नहीं हो पाया। इसके बाद नगर परिषद ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया ही नहीं गई। इस कारण नाके पर परिषद द्वारा ही वसूली की जा रही है। प्रतिदिन औसतन 40 से 56 हजार की वसूली होनी चाहिए, लेकिन अभी प्रतिदिन 20 से 22 हजार तक की राशि जमा हो रही है। इसके पीछे अधिकारियों द्वारा वाहनों की संख्या में कमी आना बताया जा रहा है।

सीसीटीवी कैमरे लगवाएंगे
मैंने दो दिन पहले ही नगर परिषद बिलौआ में प्रशासक का चार्ज लिया है। परिषद के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी रिवाइज कर रहे हैं। टोल नाके पर भी एक स्थायी कर्मचारी रखा जाएगा और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
प्रतिज्ञा शर्मा, प्रशासक, नगर परिषद बिलौआ

गड़बड़ी की जांच की जाएगी
क्रेशर मार्केट के टोल नाके पर गड़बड़ी की शिकायत पर एक दल गठित कर ड्यूटी लगाई थी। इस दौरान सब कुछ सही हो गया था। यदि अब फिर से टोल नाके पर वसूली में गडबड़ी हो रही है, तो इस मामले की जांच कराई जाएगी।
राघवेंद्र पांडेय, एसडीएम, डबरा



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2 years ago, employees who were accused of embezzlement, they were again charged with toll collection


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